GST के नौ वर्ष: उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और सुधार की आवश्यकता
लेखक: राकेश शरण मिश्र
प्रांतीय महामंत्री, उत्तर प्रदेश कर अधिवक्ता संगठन (पंजी.), लखनऊ
भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू हुए नौ वर्ष पूरे हो चुके हैं। 1 जुलाई 2017 को प्रारंभ हुई इस व्यवस्था ने देश की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को एक साझा ढाँचे में लाने का ऐतिहासिक कार्य किया। प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को GST दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर इसकी उपलब्धियों के साथ-साथ करदाताओं की समस्याओं और आवश्यक सुधारों पर विचार करना भी प्रासंगिक है।
GST का इतिहास एवं संवैधानिक आधार
विश्व में आधुनिक मूल्यवर्धित कर प्रणाली की शुरुआत फ्रांस में वर्ष 1954 में हुई थी। भारत में GST लागू करने की दिशा में डॉ. विजय केलकर सहित विभिन्न विशेषज्ञों और समितियों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। संविधान (122वाँ संशोधन) विधेयक, 2014 संसद में प्रस्तुत हुआ। राज्यसभा ने 3 अगस्त 2016 तथा लोकसभा ने 8 अगस्त 2016 को संशोधित विधेयक पारित किया। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह 101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 बना और 1 जुलाई 2017 से GST लागू हुआ।
संविधान के अनुच्छेद 279A के अंतर्गत GST परिषद का प्रावधान है। केंद्रीय वित्त मंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं तथा केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधि इसमें शामिल होते हैं। परिषद कर दरों, छूट और GST से संबंधित महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों पर सिफारिशें करती है।
GST के प्रमुख प्रकार एवं उद्देश्य
भारत में GST के चार प्रमुख घटक हैं—CGST, SGST, IGST और UTGST। इनके माध्यम से राज्य के भीतर तथा अंतरराज्यीय आपूर्ति पर निर्धारित नियमों के अनुसार कर लगाया जाता है। GST का प्रमुख उद्देश्य अनेक अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत करना, करों के दोहरे प्रभाव को कम करना, इनपुट टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था को सुदृढ़ करना और व्यापारिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाना है।
GST के अंतर्गत कर की दर वस्तु या सेवा की श्रेणी के अनुसार निर्धारित होती है। पंजीकरण की सीमा और अन्य शर्तें भी कारोबार के प्रकार तथा लागू कानून पर निर्भर करती हैं।
उपलब्धियाँ और व्यावहारिक चुनौतियाँ
GST ने पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने, कर भुगतान और अन्य प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण को बढ़ावा दिया है। इससे कर प्रशासन में तकनीक का उपयोग बढ़ा और कर अनुपालन के लिए साझा डिजिटल व्यवस्था विकसित हुई।
हालाँकि, छोटे व्यापारियों और करदाताओं के सामने रिटर्न संबंधी जटिलताएँ, पोर्टल की तकनीकी समस्याएँ, इनपुट टैक्स क्रेडिट के विवाद, रिफंड में देरी और नोटिस एवं अपील की प्रक्रियाओं से जुड़ी कठिनाइयाँ भी बनी हुई हैं। कानूनों और अधिसूचनाओं में बार-बार होने वाले बदलावों को समझना भी अनेक करदाताओं के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।
इसलिए GST को अधिक सरल, पारदर्शी और करदाता-अनुकूल बनाने के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण, तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान तथा विवादों के समयबद्ध निस्तारण की आवश्यकता है।
GST सुधारों में उपकास की भूमिका
उत्तर प्रदेश कर अधिवक्ता संगठन (पंजी.), लखनऊ—उपकास—कर अधिवक्ताओं और करदाताओं की व्यावहारिक समस्याओं को शासन एवं संबंधित प्राधिकारियों तक पहुँचाने का प्रयास करता रहा है। संगठन का उद्देश्य कर कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, करदाताओं को राहत, प्रक्रियागत कठिनाइयों के समाधान तथा GST व्यवस्था में आवश्यक सुधारों के लिए रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देना है।
उपकास समय-समय पर कर अधिवक्ताओं के सुझावों, GST संबंधी समस्याओं और कानून में अपेक्षित सुधारों को लेकर संगठनात्मक बैठकों, संगोष्ठियों तथा ज्ञापनों के माध्यम से अपनी बात संबंधित मंचों पर रखता है। GST परिषद की बैठकों में विचारार्थ प्रस्तुत प्रस्तावों और सुधारों के संदर्भ में संगठन की भूमिका करदाताओं की समस्याओं को सामने लाने तथा व्यावहारिक समाधान सुझाने की है।
कर अधिवक्ता केवल कर अनुपालन कराने वाले पेशेवर नहीं हैं, बल्कि वे करदाता और कर प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण सेतु भी हैं। उनके अनुभव और सुझावों को नीति निर्माण एवं प्रशासनिक सुधारों में उचित स्थान मिलना चाहिए।
GST को अधिक प्रभावी बनाने के लिए छोटे व्यापारियों के अनुपालन का बोझ कम करना, वैध इनपुट टैक्स क्रेडिट और रिफंड का समय पर निस्तारण, पोर्टल को अधिक विश्वसनीय बनाना तथा अपील व्यवस्था को सरल करना आवश्यक है। साथ ही, कर अधिकारियों, कर अधिवक्ताओं और व्यापारिक संगठनों के बीच नियमित संवाद स्थापित किया जाना चाहिए।
GST की वास्तविक सफलता केवल राजस्व संग्रह से नहीं, बल्कि कर व्यवस्था की सरलता, पारदर्शिता, निष्पक्षता और करदाताओं के विश्वास से भी मापी जाएगी। सरकार, GST परिषद, कर प्रशासन और कर अधिवक्ता संगठनों के समन्वित प्रयासों से ही एक ऐसी व्यवस्था विकसित हो सकती है, जो राजस्व हितों की रक्षा के साथ ईमानदार व्यापार और आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहित करे।
एक सरल, पारदर्शी और करदाता-अनुकूल GST व्यवस्था ही विकसित भारत की आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान कर सकती है।











