म्योरपुर /पंकज सिंह

म्योरपुर श्रीराम लीला मंचन के 10वे का लीला लक्ष्मण शक्ति,हनुमान जी का संजीवनी लाना, कुंभकरण वध का प्रसंग खेला गया लीला का शुरुआत अंगद रावण संवाद से होता है अंगद रावण दरबार में जाते हैं और श्री राम से संधि करने का प्रस्ताव रखते हैं रावण अपने अहंकार में अंगद का कोई बात नहीं मानता है अंगद जी द्वारा कहा जाता है कि मैं यह पर अपना धरती पर जमा रहा हूं अगर कोई योद्धा इसे हिला दिया तो प्रभु श्री राम अपने घर को वापस जाएंगे और सीता माता को हार जाएंगे अंगद का बात सुन रावन अपने वीरों को अंगद जी का पैर हिलाने के लिए भेजता है कोई भी वीर पैर को हिला नहीं पता है रावण स्वयं उठकर पैर को पकाने आता है अंगद जी बोलते हैं पैर पकड़ता है तो श्री राम का पकड़ो रावण द्वारा अपने पुत्र राजकुमार को युद्ध के लिए भेजा जाता है श्री राम से युद्ध के दौरान राजकुमार वीरगति को प्राप्त हो जाता है इसके बाद रावण मेघनाथ को युद्ध के लिए भेजता है मेघनाथ,लक्ष्मण में भयंकर युद्ध होता है मेघनाथ के शक्ति बाढ़ के वार से लक्ष्मण जी को मूर्छित हो जाते है मूर्छित होने पर श्री राम विलाप करते हैं विभीषण के कहने पर हनुमान जी लंका जाते हैं और सुसैन बैध को रामा दल में लेकर आते हैं बैध द्वारा त्रिकूट पर्वत पर संजीवनी बूटी रहने की बात बताई जाती है हनुमान जी त्रिकूट पर्वत पर जाकर संजीवनी बूटी लाते हैं लक्ष्मण जी द्वारा पुनः उठ क़र युद्ध के लिए ललकारा जाता है उधर रावण लक्ष्मण जी का मूर्तित से उठ जाना अचंभित मानकर अपने भाई कुंभकरण को युद्ध के लिए भेजता है कुंभकरण श्री राम का युद्ध होता है जिसमें कुंभकरण वीरगति को प्राप्त करता है इस दौरान पर श्री रामलीला कमेटी के महा प्रबंधक सुनील कुमार सिंह,अध्यक्ष मोनू जायसवाल,श्री रामलीला मंडली अध्यक्ष शनि अग्रहरी,अजय कुमार,पंकज सिंह,अंकित अग्रहरी,मनदीप रौनियर,रामू,ब्यास आशीष अग्रहरी (बिट्टू), सुजीत अग्रहरी, संदीप अग्रहरी,नमन प्रकाश अग्रहरी, रंजन अग्रहरी,नीरज अग्रहरी, अवनीश कुमार ,और सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।









