
सरकारी के साथ निजी अस्पतालों में भी चल रहा मरीजों का उपचार
मिर्जापुर। चील्ह थाना क्षेत्र के तिलथी गांव में डेंगू के बढ़ते प्रकोप ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में डेंगू से पीड़ित मरीजों की संख्या करीब 300 तक पहुंच गई है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि शायद ही कोई घर बचा हो, जहां कोई न कोई व्यक्ति बीमारी की चपेट में न आया हो। कई मरीज सरकारी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग निजी अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक प्रभावी रोकथाम और राहत के इंतजाम नहीं किए जाने के आरोप लग रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक बिंदु देवी, प्रीतु दुबे, सीमा दुबे, शिशु दुबे, ममता दुबे, प्रदीप कुमार, परमेश्वर, कविता, प्राची और अनमोल समेत अनेक लोग बीमारी से पीड़ित हैं। बताया जा रहा है कि पुरजागीर, गोपीगंज, तिलही, ओखला और मिर्जापुर के विभिन्न अस्पतालों में भी गांव के मरीज भर्ती हैं। मरीजों की वास्तविक संख्या सरकारी और निजी अस्पतालों के भर्ती अभिलेखों से सामने आ सकती है। सबसे गंभीर सवाल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बीमारी फैलने के बावजूद न तो गांव में नियमित कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया गया और न ही मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने के लिए कोई ठोस अभियान चलाया जा रहा है। ग्राम पंचायत, विकास खंड और जिला स्तर से भी अब तक अपेक्षित मदद नहीं मिलने की बात कही जा रही है। बीमारी से परेशान ग्रामीण इलाज और जरूरी सुविधाओं के लिए खुद ही जूझने को मजबूर हैं। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के संभागीय जिला अस्पताल स्थित एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला, मिर्जापुर में 27 अक्टूबर 2026 को ममता दुबे की जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध बताई जा रही है। इस रिपोर्ट सहित अन्य मरीजों की जांच रिपोर्ट और अस्पतालों के भर्ती आंकड़ों की जांच कर बीमारी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। सवाल यह है कि जब एक गांव में इतने बड़े पैमाने पर लोगों के बीमार होने की सूचना सामने आ रही है तो स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था कहां है। क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है। गांव में तत्काल स्वास्थ्य शिविर लगाकर घर-घर सर्वे, संदिग्ध मरीजों की जांच, मच्छरों के लार्वा का सर्वेक्षण, दवा का छिड़काव और साफ-सफाई अभियान क्यों नहीं शुरू कराया गया। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप कर तिलथी गांव में विशेष स्वास्थ्य अभियान चलाने, मरीजों का समुचित उपचार सुनिश्चित कराने तथा लापरवाही की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।









