
मथरा केकई संवाद मे मामोहक प्रसंग ने श्रद्धालु हुये मन्त्रमुक्त
म्योरपुर /पंकज सिंह
म्योरपुर मे चल रहे श्रीराम लीला मंचन के सातवे दिन राम बनवास का प्रसंग खेला गया मंचन के दौरान एसटी/एससी /आयोग के उपाध्यक्ष दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री जीत सिंह खरवार ने श्रीराम का आरती क़र कहा श्री राम वन गए उन्होंने सब कुछ छोड़ा लेकिन धनुष और तीर को नहीं छोड़ा श्री राम के परंपरा को हमारे आदिवासी समाज के लोग आज भी जीवित करके रखे हुए हैं वही दुद्धि विधानसभा प्रभारी बसपा संजय गोड़ धुर्वे ने भी श्री राम का आरती क़र कहा श्री राम के आदर्शों पर चलने कई जरूरत है प्रभु अवतार लिए थे लेकिन मानव बनकर ही मर्यादा का पालन करते हुए रावण का वध किया लीला का मंचन दशरथ दरबार से होता है दशरथ जी अपने मंत्रियों से कहते हैं कि अब मेरा चौथा पन आने को है क्यों ना अयोध्या का राज्य राम राम को सौंप दिया जाए मंत्रियों ने कहा जी महराज बहुत सुन्दर विचार हैँ आपका श्रीराम के राज्याभिषेक की सुचना देवताओं होते ही वे ब्रम्हा जी के पास जाकर कहते प्रभु ने जिस कार्य के लिए अवतार लिया है राज पाठ में व्यस्त हो जाएंगे तो राक्षसों का संघार कैसे होगा देवताओं कि बात सुनने के बाद ब्रह्मा जी मां सरस्वती का आवाहन क़र अयोध्या में मंथरा के जीवा पर बैठ जाये और श्री राम को 14 वर्ष का वनवास के लिए बोलिए उससे कहवाइये कलुआ डोम द्वारा पुरे नगर का साफ सफाई किया जाता है मंथरा महरानी केकई के पास जाकर उनसे 14 को वर्ष का बनवास और भारत जी का राज्याभिषेक के लिए केकई का कान भर देती है
मंथरा ने केकई का यह कह क़र कान भर दिया राम राजा बन जाएंगे तो तेरा बेटा नौकर ही रहेगा मंथरा की यह बात सुनकर केकई बहुत क्रोधित होती है और मंथरा को Sake घुसा मार के भागती है लेकिन मंथरा वही रहती है और कहती है राजा भारत बने या राम मैं तो दासी हूं दासी ही रहूंगी तू अपना सोच मंथरा का बात कैकई के दिमाग में घर कर जाती है और केकई कोप भवन में चली जाती है दशरथ जी को पता चलता है कोप भवन में जाने का कारण केकई जाकर पूछते हैं केकई अपना दो वन महराज से मांगती हैँ दशरथ जी कैकई को कहते हैं रघु रीत सदा चली आई प्राण जाए प्रवचन ना जाए यह सुनकर ककई प्रसन्न हो जाती है और राम की जगह भारत को rajyabhishek का वर मांगती है और श्री राम को 14 वर्षों का वनवास मांगती है यह सुन दशरथ जी मूरक्षा अवस्था में हो जाते हैं उधर पिता की बात मान श्री राम वन गमन को तैयार हो जाते हैं उनके साथ-साथ लक्ष्मण जी और माता-सीता भी बन को जाती है श्री राम के वन जाते ही पूरा अयोध्या सुना हो जाता है अयोध्या वासियों का रो-रो कर बुरा हाल हो जाता है श्री राम के इस संजीव लीला का दर्शन कर श्रद्धालु मंत्र मुक्त हो जाते हैं
मौके पर श्री रामलीला कमेटी के महा प्रबंधक सुनील कुमार सिंह,अध्यक्ष मोनू जायसवाल,श्री रामलीला मंडली अध्यक्ष शनि अग्रहरी,अजय कुमार,पंकज सिंह,अंकित अग्रहरी,मनदीप रौनियर,रामू,ब्यास आशीष अग्रहरी (बिट्टू), अजय अग्रहरी (सोनू), सुजीत अग्रहरी, संदीप अग्रहरी,नमन प्रकाश अग्रहरी, रंजन अग्रहरी,नीरज अग्रहरी, अवनीश कुमार ,और सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।










