म्योरपुर /पंकज सिंह
म्योरपुर राम लीला स्टेज पर मंचन के 5वे दिन का लीला
धनुष यज्ञ (सीता स्वयंवर) रामलीला का एक बहुत ही प्रसिद्ध प्रसंग खेला गया। मिथिला नरेश राजा जनक ने अपनी पुत्री माता सीता के स्वयंवर के लिए यह प्रण (प्रतिज्ञा) किया था कि जो भी वीर भगवान शिव के विशाल धनुष (शिवधनुष) पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ सीता का विवाह होगा। स्वयंबर में देश-विदेश से कई राजा और महाराजा आए। सबने शिवधनुष उठाने और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने की कोशिश की, लेकिन कोई उसे हिला तक नहीं सका। इसी दौरान रावण भी शिव धनुष को तोड़ने आता हैँ एव बाड़ासुर भी धनुष को प्रणाम करने आते है दोनों मे बहुत ही रोचक संवाद होता है बाड़ासुर धनुष को प्रणाम क़र अपने घर को लौट जाते हैँ उधर रावण धनुष तोड़ने के लिए जैसे आगे बाढ़ता है देवताओं मे हलचल मच जाता है जैसे रोबोट धनुष को तोड़ने आगे बढ़ता है आकाशवाणी होता है रावण तुम्हारी भगिनी को मैदानो हरण करके ले जा रहा है जा उसे बचा आकाशवाणी सुन रावण अपनी भागनी को बचाने जाता है और भरी सभा में प्रण करता है सिते तुझे एक बार लंका का दर्शन अवश्य करूंगा यह कहा रावण वापस हो जाता है रावण के जाने के बाद देश देश से आये कोई राजा धनुष तोड़ना तो दूर उसे हिला ना सके राजा जनक ने निराश होकर सभा में वचन कहे, तब गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम आसन से उठे। श्रीराम ने आदरपूर्वक शिवधनुष को उठाया और जैसे ही प्रत्यंचा चढ़ाई, वह भारी धनुष बीच से टूट गया। शिवधनुष टूटने के साथ ही पूरा राम लीला पांडाल जय श्री राम के नारों से गूंज उठा। इसके बाद माता सीता ने आगे बढ़कर श्रीराम के गले में वरमाला डाल दी। शिवधनुष टूटने की आवाज सुनकर महाक्रोधित होकर महर्षि परशुराम जनक के दरबार में पहुंचे। उन्होंने धनुष तोड़ने वाले का नाम पूछा। तब भगवान श्रीराम के विनम्र वचनों और श्रीलक्ष्मण के साथ उनके तीखे किंतु ज्ञानवर्धक संवाद हुए, जिससे अंत में परशुराम का क्रोध शांत हुआ और वे आशीर्वाद देकर चले गए।मौके पर श्री रामलीला कमेटी के महा प्रबंधक सुनील कुमार सिंह,अध्यक्ष मोनू जायसवाल,श्री रामलीला मंडली अध्यक्ष शनि अग्रहरी,अजय अग्रहरी, पंकज सिंह,अंकित अग्रहरी,मनदीप रौनियर,रामू,ब्यास आशीष अग्रहरी (बिट्टू), अजय अग्रहरी (सोनू), सुजीत अग्रहरी, संदीप अग्रहरी,नमन प्रकाश अग्रहरी, रंजन अग्रहरी,नीरज अग्रहरी, अवनीश कुमार ,और सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।











