म्योरपुर /पंकज सिंह
म्योरपुर रामलीला स्टेज पर गुरुवार को नारद मोह कि मनमोहक लीला खेली गयी मंचन का शुरुवात इन्द्र देव के दरबार से होता नारद जी हिमालय के तराई मे तपस्या मे लीन थे इसी दौरान इन्द्र देव का सिंघासन हिलने लगता है इन्द्र देव काला देव को पता लगाने के लिए भेजते है काला देव हिमालय कि तराई मे नारद जी का तपस्या मे लीन होना होना इन्द्र देव से बताता है नारद जी का तपस्या भंग करने के लिए मेनका आदि अप्सराओ के साथ इन्द्र देव कामदेव को नारद जी का तपस्या भंग करने को भेजते है काम देव नारद जी का तपस्या भंग करते है जिससे नारद जी क्रोधित हो जाते है काम बताते है काम देव क्षमा मांग तपस्या भंग करने कि बात इन्द्र देव के कहने पर आने कि बात बताते है जिसे सुन नारद जी प्रसन्न होते हैं और अपनी प्रशंसा जाकर भगवान शंकर को बताते हैं कि मैं इंद्र पर विजय पा गया भगवान शंकर बोलते हैं जो बात मुझसे आप बताएं हैं वह बात ब्रह्मा जी से मत बताइएगा नारद जी बोलते हैं कि मैं इंद्र पर विजय पा गया हू जिसे सुन देवता जल रहे हैं ब्रह्मा जी के पास जाकर सारी बात नाराजी बताते हैं ब्रह्मा जी बोलते हैं अब आप विष्णु भगवान से मत यह बात कहना लेकिन नारद जी नहीं मानते है विष्णु जी के पास जाकर नारद जी अपने तपस्या के बारे मे बताया नारद के मन मे अहंकार रूपी बीज उत्पन्न देख विष्णु जी लीला रचते है नारद जी श्रीनिवास पुर विचरण करते करते पहुंचते है राजा शिलनिधि द्वारा सम्मान सहित महल मे लाकर नारद जी का आदर सत्कार करते है इसी दौरान शील निधि राजा द्वारा अपनी पुत्री विश्व मोहिनी का स्यबर के बारे मे नारद जी को बताते है विश्व मोहिनी का हस्त रेखा देख नारद जी बताते है रेखाएं साफ बताती है इसका पति अजर अमर होगा यह कह नारद जी महल से चल देते है इसी दौरान उनके मन मे मोह जाग जाता है क्यों ना विश्व मोहिनी से मै ही विवाह कर लु यह सोच नारद जी विष्णु जी के पास जाकर विष्णु जी स्वरूप मांगते है विष्णु जी बंदर का स्वरूप नारद जी को दे देते है विष्णु जी द्वारा बानर का रूप पा नारद जी पुनः श्रीनिवास पुर स्वयंवर मे प्रतिभाग करने जाते है नारद जी का बंदर का मुख देख महल के मंत्री एव नारद जी खूब उपहास करते है नारद जी बोलते है स्वयंवर मे विवाह करने आया हू इसी दौरान विश्व मोहनी आती है स्वंबर मे नारद जी को जय माला ना पहना कर भगवान विष्णु जी पहना देती है मंत्री नारद जी को आईना दिखाते हैं आईना में अपना चेहरा बंदर का देखना रज्जी क्रोधित हो जाते हैं और विष्णु दरबार जा विष्णु जी को श्राप देते हैं जिस प्रकार में नारी के प्रयोग में हूं वैसे ही तुम अपने पत्नी के वियोग में रहोगे और बंधन भटकोगे और मंत्रियों को बोलते हैं कि तुम अगले जन्म में मेरा अच्छा सो जाओगे यही से लीला का समापन होता है
मौके पर श्री रामलीला कमेटी के महा प्रबंधक सुनील कुमार सिंह,अध्यक्ष मोनू जायसवाल,श्री रामलीला मंडली अध्यक्ष शनि अग्रहरी,मीडिया प्रभारी पंकज सिंह,अंकित अग्रहरी, रामू,ब्यास आशीष अग्रहरी (बिट्टू), अजय अग्रहरी (सोनू), सुजीत अग्रहरी, संदीप अग्रहरी,नमन प्रकाश अग्रहरी, रंजन अग्रहरी, ब्रह्मदेव तिवारी, आलोक अग्रहरी,नीरज अग्रहरी,और सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।











