
प्रभावित परिवारों ने सुरक्षित पुनर्वास के बिना मकान खाली करने से किया इनकार, प्रशासन से न्यायोचित समाधान की मांग ।।
बीजपुर (सोनभद्र) एनटीपीसी रिहंद द्वारा अधिग्रहित भूमि पर बने कथित अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई एक बार फिर तेज हो गई है। मंगलवार को सिरसोती गावँ के महुआबारी में कई मकानों पर एनटीपीसी प्रबंधन की ओर से नोटिस चस्पा कर संबंधित लोगों को नोटिस प्राप्त होने की तिथि से सात दिनों के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। साथ ही नोटिस में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है।
नोटिस चस्पा होने के बाद महुआबारी में लोगों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल है। मौके पर पहुंचे मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत में एनटीपीसी के लॉ अधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि फिलहाल संबंधित लोगों से सात दिनों के भीतर अपना लिखित जवाब मांगा गया है। उन्होंने कहा कि जवाब मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, जब उनसे प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था के संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने इस विषय पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इससे प्रभावित परिवारों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे किसी भी प्रकार की कानूनी प्रक्रिया का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन बिना उचित पुनर्वास और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराए अपने आशियाने छोड़ना उनके लिए संभव नहीं है। उनका कहना है कि दशकों से रह रहे परिवारों के भविष्य को सुरक्षित किए बिना बेदखली की कार्रवाई मानवीय दृष्टि से उचित नहीं होगी ।
प्रभावित परिवारों ने बताया कि वे पहले भी एनटीपीसी प्रबंधन के सामने अपना पक्ष रख चुके हैं। इसके अलावा जिलाधिकारी एवं उपजिलाधिकारी से भी हस्तक्षेप कर न्यायसंगत समाधान की मांग की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।
उल्लेखनीय है कि एनटीपीसी रिहंद द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि ग्राम महुआबारी स्थित अधिग्रहित भूमि पर किए गए कथित अवैध निर्माणों को एक सप्ताह के भीतर स्वयं हटा लिया जाए। अन्यथा एनटीपीसी प्रबंधन नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी।
नोटिस चस्पा होने से महुआबारी में विस्थापन और पुनर्वास का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है। अब लोगों की नजरें प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं। प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि अंतिम निर्णय से पहले उनकी समस्याओं और पुनर्वास की मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।










